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मन करता है -10-Mar-2023

प्रतियोगिता हेतु
दिनांक: 10/03/2023

मन करता है 

मन करता है उड़ू आकाश में,
मन करता है जीऊँ संसार में।
मन से मैं भी खुलकर हसना चाहती हूँ।
मन से मैं भी खुलकर जीना चाहती हूँ।
खेलना चाहती हूँ घर-आँगन में,
चिड़ियों की तरह चहकना चाहती हूँ
मन से अपनी माँ का दुलार चाहती हूँ।।

मन में मेरे हैं जो भी सपने,
उन्हें मैं पूरा करना चाहती हूँ।
मैं एक कन्या हूँ....
सभी स्वीकार करें मुझे दिल से।
बोझ ना समझे कोई भी 
प्रेम करें सब मुझे भी दिल से।।

यह मन ही तो है जो 
हमारे अंदर की भावनाओं को 
सहेजकर रखता है।
मन ही तो है जो अच्छे बुरे का
आभास कराता है।।

करती है एक बेटी मन से 
यह विनती सभी से बार - बार।
एक मन ऐसा भी रखो जो 
बेटियों को संसार में,
जीने का दे अधिकार।
बेटियाँ ना समझी जाएँ बोझ कहीं भी,
उन्हें भी मिले अपने हिस्से का प्यार।।

बेटी को चाहिए नहीं धन दौलत, 
वह केवल प्यार और दुलार चाहती है।
अपने लिए एक सुरक्षित 
अधिकार चाहती है।
थोड़ी सी खुशी और 
सिर पर माता पिता का 
हाथ चाहती है।।

बात नहीं बहुत बड़ी पर 
बहुत गहरी है।
बेटी है तो दुनिया है,
हर शादी बेटियों ही से चमकती है।।

शाहाना परवीन"शान"...✍️

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10 Comments

शानदार

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Gunjan Kamal

12-Mar-2023 09:18 AM

सुंदर प्रस्तुति

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Varsha_Upadhyay

11-Mar-2023 09:29 PM

बेहतरीन

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